मिट्टी की सेहत मिशन को मिला नया आयाम: युवाओं के जरिए बदलेगी उर्वरक उपयोग की तस्वीर!
नई दिल्ली, – देश की घटती मिट्टी उर्वरता और यूरिया के असंतुलित उपयोग को लेकर बढ़ती चिंता के बीच उर्वरक विभाग ने जमीनी स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF) में कार्यरत लगभग 100 कृषि स्नातकों से सीधा संवाद कर उन्हें “मिट्टी स्वास्थ्य दूत” की भूमिका निभाने का आह्वान किया।
बैठक में साफ संदेश दिया गया कि भविष्य की कृषि संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक विकल्पों और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) पर आधारित होगी।
क्यों जरूरी है यह पहल?
मिट्टी संकट की वास्तविक तस्वीर
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देश के कई राज्यों में मिट्टी का कार्बन स्तर घटकर 0.5% से नीचे पहुंच रहा है (आदर्श 0.75–1.0% माना जाता है)।
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नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटाश (NPK) का अनुपात कई जगह 8:3:1 तक बिगड़ा हुआ है, जबकि संतुलित अनुपात 4:2:1 माना जाता है।
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अधिक यूरिया से मिट्टी कठोर होती है और जल धारण क्षमता घटती है।
➡️ समाधान: “संतुलित उर्वरक + जैविक पूरक + मृदा परीक्षण आधारित सिफारिश”।
यूरिया का असंतुलित उपयोग: मिट्टी के लिए खतरे की घंटी

सचिव ने कृषि स्नातकों से पूछा कि क्या अधिक मात्रा में यूरिया के प्रयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है? चर्चा में सामने आया कि कई क्षेत्रों में:
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मिट्टी में कार्बन का स्तर घट रहा है
- भूमि की संरचना कठोर हो रही है, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी बढ़ रही है
उन्होंने स्पष्ट कहा कि टिकाऊ कृषि के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) को बढ़ावा देना ही भविष्य का रास्ता है। जैविक खाद, हरी खाद और कंपोस्ट के उपयोग को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
किसान हमारे वीआईपी’ – प्रधानमंत्री के विजन पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘किसान हमारे वीआईपी हैं’ का उल्लेख करते हुए सचिव ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सरकार, कंपनियों और किसानों के बीच मजबूत संवाद सेतु बनें।
उन्होंने कहा, “सरकार लगातार फीडबैक ले रही है। आप युवा पेशेवर ही जमीनी बदलाव के असली वाहक हैं।”
8 पद्मश्री विजेताओं से भी हो चुकी है चर्चा
मिट्टी संरक्षण मिशन को मजबूत करने के लिए उर्वरक विभाग अब तक 8 पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं से भी संवाद कर चुका है। सचिव ने कृषि स्नातकों को निर्देश दिया कि वे जैविक खेती अपनाने वाले किसानों की सफलता की कहानियां तैयार करें, ताकि अन्य किसान भी प्रेरित हो सकें।
जैविक खेती, वर्मीकम्पोस्ट और ‘लखपति दीदी’ से जुड़ेगा अभियान
बैठक में सुझाव दिया गया कि वर्मीकम्पोस्ट और जैविक खेती से जुड़ी योजनाओं की जानकारी स्वयं सहायता समूहों (SHG) और ‘लखपति दीदी’ जैसे अभियानों के माध्यम से घर-घर पहुंचाई जाए।
गोरखपुर के कृषि स्नातक अवधेश सिंह ने बताया कि संतुलित उर्वरक उपयोग से न केवल फसल उत्पादन बढ़ा बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
नीति और जमीनी हकीकत के बीच सेतु
इस अहम बैठक में उर्वरक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, HURL और RCF के शीर्ष प्रबंधन भी उपस्थित रहे। समापन पर यह संकल्प लिया गया कि जमीनी स्तर से मिले सुझावों को नीतियों में शामिल किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की उर्वरता सुरक्षित रखी जा सके और भारतीय किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनें।
किसानों के लिए क्या होगा सीधा लाभ?
| पहल | किसानों को लाभ |
|---|---|
| संतुलित उर्वरक उपयोग | 10–15% तक लागत में कमी |
| जैविक पूरक | मिट्टी की संरचना में सुधार |
| INM मॉडल | 8–12% तक उपज वृद्धि |
| मृदा परीक्षण | सही फसल-उर्वरक चयन |
📌 आगे की कार्ययोजना (Action Points)
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हर ब्लॉक में “मिट्टी स्वास्थ्य जागरूकता शिविर”
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सफलता की कहानियों का डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन
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संतुलित उर्वरक पर पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण
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2026–27 तक 25% गांवों में INM मॉडल लागू करने का लक्ष्य
🎯सारांश
यह पहल केवल एक बैठक नहीं, बल्कि रासायनिक निर्भरता से संतुलित पोषण मॉडल की ओर संक्रमण का संकेत है। यदि युवा पेशेवर और किसान मिलकर काम करें, तो आने वाले दशक में भारत की मिट्टी फिर से उपजाऊ और टिकाऊ बन सकती है।
