औषधीय पौधों की खेती को नई रफ्तार: एनएमपीबी की पहल से किसानों के लिए खुले आय के नए रास्ते !!
नई दिल्ली -देश में पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अब औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए आय का मजबूत विकल्प बनती जा रही है। आयुष मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने इस दिशा में व्यापक पहल करते हुए वैल्यू चेन आधारित मॉडल को बढ़ावा दिया है, जिससे उत्पादन से लेकर विपणन तक किसानों को समग्र लाभ मिल सके।
मरुस्थलीय क्षेत्रों के लिए ‘गेम चेंजर’ बन रही औषधीय खेती !!
एनएमपीबी द्वारा विशेष रूप से गुग्गुल (Commiphora wightii) और एलोवेरा (Aloe barbadensis) जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो कम पानी और कठिन जलवायु में भी अच्छी उपज देती हैं। राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में यह पहल किसानों के लिए नई संभावनाएं खोल रही है।
वैल्यू एडिशन:
सूखा प्रभावित इलाकों में पारंपरिक फसलों की तुलना में कम जोखिम औषधीय उपयोग के कारण बाजार में स्थिर मांग
निर्यात की भी उच्च संभावनाएं आने वाले वर्षों में हर्बल उत्पादों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ भारतीय किसानों को मिल सकता है।
किसानों को मिल रहा ‘एंड-टू-एंड’ सपोर्ट !! 
एनएमपीबी केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर काम कर रहा है। इसके तहत किसानों को:
उच्च गुणवत्ता का रोपण सामग्री (QPM)
गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस (GAP) की ट्रेनिंग
फसल कटाई के बाद प्रबंधन (Post-Harvest Management)
उत्पाद का वैल्यू एडिशन और पैकेजिंग
बाजार से जोड़ने की सुविधा
वैल्यू एडिशन:
इस मॉडल से किसान केवल कच्चा माल बेचने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग के जरिए अधिक मुनाफा कमा सकेंगे।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी प्राथमिकता !!
औषधीय पौधों के संरक्षण के लिए “मेडिसिनल प्लांट कंजर्वेशन एंड डेवलपमेंट एरिया (MPCDA)” स्थापित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में प्राकृतिक आवास में पौधों का संरक्षण और संवर्धन किया जा रहा है। जैव विविधता का संरक्षण
वन आधारित आजीविका को बढ़ावा पर्यावरण संतुलन में सुधार
डिजिटल क्रांति: ‘ई-चरक’ से बदलेगा हर्बल मार्केट !!
एनएमपीबी द्वारा लॉन्च किया गया ‘ई-चरक’ मोबाइल ऐप औषधीय पौधों के व्यापार में पारदर्शिता और पहुंच बढ़ाने का बड़ा माध्यम बन रहा है।
मुख्य आंकड़े:
11,000+ पंजीकृत उपयोगकर्ता
3 करोड़ से अधिक विजिट
7,500+ उत्पाद सूचीबद्ध
70 लाख से अधिक खरीदार-विक्रेता संपर्क
किसानों को वास्तविक बाजार मूल्य की जानकारी
बिचौलियों पर निर्भरता कम
राष्ट्रीय स्तर पर खरीदारों से सीधा संपर्क
2000 हेक्टेयर में विस्तार का लक्ष्य !!
वित्त वर्ष 2023-24 से शुरू की गई परियोजनाओं के तहत लगभग 2000 हेक्टेयर क्षेत्र में औषधीय पौधों की खेती को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। राजस्थान और गुजरात सहित कई राज्यों में 15 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।
वैल्यू एडिशन:
यह कदम बड़े पैमाने पर क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देगा, जिससे लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा।
प्रशिक्षण और जागरूकता पर बड़ा निवेश !!
2020-21 से 2024-25 के बीच 138 परियोजनाओं के तहत 1171.94 लाख रुपये खर्च कर प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। किसानों को आधुनिक तकनीक की जानकारी , युवाओं और महिला समूहों की भागीदारी , स्टार्टअप और एग्री-एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा नीतिगत चुनौती और समाधान।
हालांकि योजना के तहत सीधे खेती के लिए सब्सिडी नहीं दी जाती, लेकिन अवसंरचना, गुणवत्ता परीक्षण और विपणन के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
विश्लेषण !!
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीधे खेती पर भी प्रोत्साहन दिया जाए तो यह क्षेत्र और तेजी से बढ़ सकता है राज्यों के साथ बेहतर समन्वय और निजी निवेश से इस सेक्टर में क्रांति संभव है सरकार का दृष्टिकोण आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव ने लोकसभा में बताया कि औषधीय पौधों की वैल्यू चेन को मजबूत कर किसानों की आय बढ़ाने और भारत को हर्बल उत्पादों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सारांश !!
औषधीय पौधों की खेती केवल एक कृषि विकल्प नहीं, बल्कि यह कृषि, स्वास्थ्य और व्यापार का संगम बनकर उभर रही है। यदि इस क्षेत्र में निरंतर निवेश, प्रशिक्षण और बाजार सुविधा मिलती रही, तो यह किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
चित्र: प्रतीकात्मक

