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नई दिल्ली में पशु चिकित्सकों के लिए राष्ट्रीय कार्यशाला

“पशु चिकित्सक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं”: प्रो. एसपी सिंह बघेल नई दिल्ली। पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारत सरकार ने विश्व पशु चिकित्सा दिवस 2025 के अवसर पर नई दिल्ली में एक भव्य राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन कर देश भर के पशु चिकित्सकों को सम्मानित किया। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती […]

“पशु चिकित्सक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं”: प्रो. एसपी सिंह बघेल

नई दिल्ली। पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारत सरकार ने विश्व पशु चिकित्सा दिवस 2025 के अवसर पर नई दिल्ली में एक भव्य राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन कर देश भर के पशु चिकित्सकों को सम्मानित किया। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए पशु चिकित्सा समुदाय को “ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय जैव सुरक्षा की रीढ़” करार दिया।

अपने संबोधन में प्रो. बघेल ने कहा, “भारत के 536 मिलियन पशुधन विश्व में सर्वाधिक हैं, जिन पर लगभग 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी निर्भर है।” उन्होंने पशु चिकित्सा ढांचे के आधुनिकीकरण और कौशल विकास को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, “स्वस्थ पशुओं के बिना स्वस्थ भारत की कल्पना नहीं की जा सकती।”

इस अवसर पर “पशु स्वास्थ्य एक टीम लेता है” विषय पर आधारित कार्यशाला में, एकीकृत पशु, मानव और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए सहयोगी प्रयासों की जरूरत को रेखांकित किया गया। प्रो. बघेल ने खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत अब तक 114.56 करोड़ एफएमडी और 4.57 करोड़ ब्रुसेलोसिस के टीके लगाए जा चुके हैं।

स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और उन्नत प्रजनन तकनीकों के उपयोग पर जोर

केंद्रीय राज्य मंत्री ने देशी पशुधन नस्लों के संरक्षण और उन्नत प्रजनन तकनीकों जैसे सेक्स-सॉर्टेड वीर्य और 100 प्रतिशत इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के लक्ष्य को प्राप्त करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल निगरानी प्लेटफॉर्म ‘भारत पशुधन’ जैसी पहलों से रोगों का शीघ्र पता लगाने और रोकथाम में मदद मिल रही है।

वर्चुअल संबोधन में सचिव ने पेशेवरों की कमी का उल्लेख किया

पशुपालन और डेयरी विभाग की सचिव सुश्री अलका उपाध्याय ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए देश में पशु चिकित्सकों की भारी कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पशु चिकित्सा शिक्षा में सीटों की वृद्धि, अत्याधुनिक सुविधाओं की स्थापना और व्यावहारिक प्रशिक्षण केंद्रों की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा, “भारत आज आईवीएफ, सेक्स-सॉर्टेड वीर्य, मवेशी टीकाकरण और डेयरी उपकरण निर्माण में आत्मनिर्भर बन रहा है, लेकिन पेशेवर क्षमता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।”

ग्लोबल मंच पर भारत की भूमिका की सराहना

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के सहायक महानिदेशक और प्रमुख पशुचिकित्सक डॉ. थानावत तिएनसिन ने रोम से वर्चुअल माध्यम से शामिल होते हुए से भारत को महामारी कोष के तहत मिली वैश्विक मान्यता की सराहना की। वहीं, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत मित्रा ने खाद्य प्रणालियों में पशु चिकित्सकों की ‘अदृश्य रक्षक’ के रूप में भूमिका को रेखांकित किया।

तकनीकी सत्रों और क्विज प्रतियोगिता ने बढ़ाया कार्यक्रम का आकर्षण

राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान पशुपालन में जेनेरिक दवाओं के उपयोग, एवियन इन्फ्लुएंजा जैसे रोगों की रोकथाम में पशु चिकित्सकों की भूमिका, एकीकृत रोग निगरानी और डेटा साझाकरण पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त, एक आकर्षक राष्ट्रीय ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई।

कार्यक्रम में डीएएचडी की अतिरिक्त सचिव सुश्री वर्षा जोशी, अपर सचिव डॉ. रमाशंकर सिन्हा सहित विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारी, अनुसंधान संस्थानों के निदेशक और पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित रहे। इस अवसर पर 250 से अधिक प्रतिनिधि नई दिल्ली में भौतिक रूप से उपस्थित रहे, जबकि 3000 से अधिक प्रतिभागियों ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की।

कार्यक्रम ने पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में बढ़ती सार्वजनिक जागरूकता और पशु चिकित्सकों की महती भूमिका को एक बार फिर से राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया।

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