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🌻 खरीफ और रबी दोनों के लिए – एक ही सूरजमुखी समाधान!

🚜 अब हर किसान लगाए TILHANTEC-SUNH-3 और कमाए बंपर मुनाफा! हाईब्रिड सूरजमुखी किस्म ‘TILHANTEC-SUNH-3 (IIOSH-434)’ किसानों के लिए वरदान, अधिक उपज और अधिक तेल उत्पादन आईसीएआर-तेल बीज अनुसंधान संस्थान, राजेन्द्रनगर द्वारा विकसित किस्म, खरीफ व रबी दोनों मौसम में उपयुक्त हैदराबाद/राजेन्द्रनगर –भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत कार्यरत तेल बीज अनुसंधान संस्थान, राजेन्द्रनगर ने किसानों के […]

🚜 अब हर किसान लगाए TILHANTEC-SUNH-3 और कमाए बंपर मुनाफा!

हाईब्रिड सूरजमुखी किस्म ‘TILHANTEC-SUNH-3 (IIOSH-434)’ किसानों के लिए वरदान, अधिक उपज और अधिक तेल उत्पादन 
आईसीएआर-तेल बीज अनुसंधान संस्थान, राजेन्द्रनगर द्वारा विकसित किस्म, खरीफ व रबी दोनों मौसम में उपयुक्त

हैदराबाद/राजेन्द्रनगर –भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत कार्यरत तेल बीज अनुसंधान संस्थान, राजेन्द्रनगर ने किसानों के लिए एक नई उन्नत हाईब्रिड सूरजमुखी किस्म ‘TILHANTEC-SUNH-3 (IIOSH-434)’ जो न केवल दोनों मौसमों (खरीफ और रबी) के लिए उपयुक्त है, बल्कि इससे अधिक उत्पादन और अधिक तेल की मात्रा प्राप्त की जा सकती है। यह किस्म वर्षा आधारित और सिंचित दोनों ही प्रकार की खेती में शानदार परिणाम दे रही है।

💧उपज में बढ़त, लागत में बचत

इस सूरजमुखी किस्म से किसानों को सिंचित खेतों में 20–26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और वर्षा आधारित खेतों में 15–20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज प्राप्त हो सकती है। यह किस्म मात्र 87–90 दिनों में परिपक्व हो जाती है, जिससे कम समय में अधिक फसल लेने की सुविधा मिलती है।

तेल की गुणवत्ता बनी खास पहचान

‘TILHANTEC-SUNH-3’ की सबसे बड़ी विशेषता इसका उच्च तेल अंश (Oil Content) है। इस किस्म में 37.8% तक तेल की मात्रा पाई जाती है, जो किसानों को बाजार में बेहतर दाम दिलाने में सहायक सिद्ध होती है। यह किस्म खाद्य तेल उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

🛡️ रोग प्रतिरोधक क्षमता से सुरक्षित फसल

इस किस्म की एक और विशेषता यह है कि यह प्रमुख फफूंद जनित रोग ‘डाउनि मिल्ड्यू’ (Downy Mildew) के प्रति प्रतिरोधक है। इसके अलावा यह हानिकारक कीट लीफहॉपर के प्रति मध्यम प्रतिरोध क्षमता भी रखती है। इससे किसानों को कीटनाशकों पर कम खर्च करना पड़ता है और फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।

🔖 इन राज्यों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त

उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर कर्नाटक, दक्षिण कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना। इन क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी की प्रकृति इस किस्म के लिए उपयुक्त मानी गई है।

संस्थान की पहल किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सराहनीय

आईसीएआर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह किस्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “दुगुनी आय” वाले विजन को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है। तेल बीजों में आत्मनिर्भरता लाने और किसानों को टिकाऊ विकल्प देने के उद्देश्य से यह शोध महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

📌 मुख्य विशेषताएं एक नजर में

  • दोनों मौसम (खरीफ-रबी) में उपयुक्त

  • सिंचित में 26 और वर्षा आधारित में 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज, 87–90 दिन में फसल तैयार, 37.8% तेल की मात्रा, डाउनि मिल्ड्यू से प्रतिरोधी, लीफहॉपर से मध्यम प्रतिरोध, कई राज्यों के लिए अनुशंसित

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