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आईएआरआई करनाल में कृषि नवाचार की नई पहल

💧 वैज्ञानिक पद्धतियों से आत्मनिर्भर खेती की दिशा में बड़ा कदम करनाल, हरियाणा: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई.सी.ए.आर.)–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आई.ए.आर.आई.), नई दिल्ली द्वारा संचालित अनुसूचित जाति उप-योजना (एस.सी.एस.पी.) के अंतर्गत आई.ए.आर.आई. क्षेत्रीय केंद्र, करनाल में “प्रशिक्षण एवं बीज वितरण कार्यक्रम” का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, विशेषकर अनुसूचित जाति […]

💧 वैज्ञानिक पद्धतियों से आत्मनिर्भर खेती की दिशा में बड़ा कदम

करनाल, हरियाणा: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई.सी.ए.आर.)–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आई.ए.आर.आई.), नई दिल्ली द्वारा संचालित अनुसूचित जाति उप-योजना (एस.सी.एस.पी.) के अंतर्गत आई.ए.आर.आई. क्षेत्रीय केंद्र, करनाल में “प्रशिक्षण एवं बीज वितरण कार्यक्रम” का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, विशेषकर अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, पोषक तत्व प्रबंधन और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी देना था, ताकि वे आत्मनिर्भर और लाभकारी खेती की दिशा में आगे बढ़ सकें।

 मुख्य अतिथि डॉ. आर.एन. पडारिया

संयुक्त निदेशक (प्रसार), आई.ए.आर.आई., नई दिल्ली ने कहा कि “अनुसूचित जाति उप-योजना का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि किसानों में वैज्ञानिक सोच और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। जब किसान स्वयं नवाचार करेंगे, तभी वास्तविक कृषि क्रांति संभव होगी।” उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण, जैविक खाद, जल संरक्षण और पराली प्रबंधन जैसी तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।

विशिष्ट अतिथि

विजय सेतिया, पूर्व अध्यक्ष, अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ ने कहा कि “भारतीय कृषि को प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीजों और वैज्ञानिक विधियों पर ध्यान देना आवश्यक है। फसल विविधीकरण और आधुनिक विपणन से किसान अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं।”

डॉ. संदीप कुमार लाल, नोडल अधिकारी

(एस.सी.एस.पी.) ने योजना की रूपरेखा और अब तक हुए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आई.ए.आर.आई. लगातार कमजोर वर्गों के किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले इनपुट्स और तकनीकी सहायता पहुँचा रहा है।

डॉ. शिव कुमार यादव, अध्यक्ष, (IARI)

क्षेत्रीय स्टेशन, करनाल ने किसानों से कहा कि “बीज उत्पादन केवल तकनीकी कार्य नहीं, बल्कि एक आर्थिक अवसर है, जो किसानों को उद्यमी बना सकता है।” उन्होंने किसानों को संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने और तकनीकी दूत बनने का आह्वान किया।

डॉ. संदीप सिहाग

पर्यावरण-अनुकूल और जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि “पराली का उपयोग ऊर्जा, खाद और पशु आहार के रूप में किया जा सकता है, जिससे प्रदूषण घटेगा और आय बढ़ेगी।”

कार्यक्रम में लगभग 500 किसान भाइयों और बहनों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को संस्थान की ओर से गेहूँ एवं सरसों की उन्नत किस्मों के बीज, वर्मी कम्पोस्ट, जिंक सल्फेट, स्प्रे पंप और सब्जी बीज किट वितरित किए गए। किसानों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें आधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई प्रेरणा मिलती है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. अश्वनी कुमार, प्रधान वैज्ञानिक सहित कई तकनीकी, प्रशासनिक एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता यादव, प्रधान वैज्ञानिक, आई.ए.आर.आई., करनाल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राकेश सेठ ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में डॉ. रेनू सिंह, डॉ. रूचि बंसल, डॉ. शशांक पी. आर., डॉ. चंद्रमणि वाघमरे (आई.ए.आर.आई., नई दिल्ली) और डॉ. रविंदर कुमार (भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल) सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

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