राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की पहली बैठक सम्पन्न; मखाना क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ₹476 करोड़ की केंद्रीय स्कीम को मिली मंजूरी
नई दिल्ली। भारत के उभरते हुए मखाना उद्योग को नई दिशा और गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की पहली आधिकारिक बैठक कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मखाना क्षेत्र के समग्र विकास, बीज गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात विस्तार के लिए विस्तृत योजना को अंतिम रूप दिया गया।
इस बैठक को मखाना क्षेत्र में वैज्ञानिक, समन्वित और बाजारोन्मुखी विकास की दिशा में पहले बड़े राजनीतिक-संगठनात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्रीय क्षेत्र की ₹476 करोड़ की स्कीम पर कार्य प्रारंभ
बैठक में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत ₹476.03 करोड़ की मखाना विकास स्कीम को लागू करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई। यह स्कीम 2025-26 से 2030-31 तक चलेगी और इसमें निम्न मुख्य क्षेत्रों पर फोकस रखा गया है
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अनुसंधान और नवाचार
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गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन एवं वितरण
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किसानों की क्षमता वृद्धि और प्रशिक्षण
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नई खेती तकनीकों को बढ़ावा
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कटाई और कटाई के बाद तकनीकों का उन्नयन
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ग्रेडिंग, सुखाने, पॉपिंग एवं पैकेजिंग अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण
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मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और बाज़ार लिंकिंग
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निर्यात प्रोत्साहन और गुणवत्ता नियंत्रण
इस स्कीम का प्रमुख उद्देश्य मखाना उद्योग को स्थानीय स्तर से वैश्विक बाजारों तक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
बीज आवश्यकता को पूरा करने के लिए राज्यों को मिलेगा सहयोग
बैठक में मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए बीज आपूर्ति को सर्वाधिक प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया।
इसके तहत:
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एसएयू सबौर, भागलपुर
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सीएयू समस्तीपुर, बिहार
इन दोनों को 2025 और 2026 सीजन के लिए विभिन्न राज्यों की बीज मांग को पूरा करने की ज़िम्मेदारी दी गई है। इससे मखाना की खेती का विस्तार न केवल पारंपरिक क्षेत्रों में बल्कि गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी संभव होगा।
राज्यों की वार्षिक कार्ययोजना को मिली मंजूरी
बैठक में राज्यों और अनुसंधान संस्थानों द्वारा प्रस्तुत वार्षिक कार्ययोजनाओं (Annual Action Plans) की विस्तृत समीक्षा की गई और विभिन्न राज्यों के लिए लक्षित बजट आवंटन को मंजूरी दी गई।
इन योजनाओं में शामिल हैं:
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उन्नत किस्मों के प्रसार के कार्यक्रम
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किसानों और प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल
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उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन का रोडमैप
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राज्यवार निर्यात प्रोत्साहन योजनाएँ
अत्याधुनिक तकनीक और कौशल विकास पर जोर
मखाना मूल्य शृंखला को उन्नत बनाने के लिए तकनीकी संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई। इस संदर्भ में:
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राज्य कृषि विश्वविद्यालय,
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केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय,
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एनआरसी मखाना (दरभंगा)
को प्रशिक्षकों और किसानों को आधुनिक मखाना उत्पादन तकनीक, प्रसंस्करण विधि, गुणवत्ता सुधार और बाजार से जुड़ाव के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी दी गई।
इन संस्थानों के सहयोग से उत्पादन क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके अपनाने और किसानों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़े बदलावों की उम्मीद है।
मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात विस्तार की रणनीति तैयार
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के मखाना उत्पादों को ग्लोबल मार्केट में स्थापित करने के लिए—
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उच्च गुणवत्ता वाली पैकेजिंग,
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ब्रांड निर्माण,
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बाजार विविधीकरण,
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और निर्यात मानकों को पूरा करने
पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके लिए प्रसंस्करण इकाइयों को मजबूत करने, MSMEs को जोड़ने और किसानों के समूहों (FPOs) को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया।
समन्वित विकास के लिए तैयार हुई राष्ट्रीय रूपरेखा
इस ऐतिहासिक पहली बैठक में मखाना क्षेत्र के वैज्ञानिक, तकनीकी और व्यावसायिक एकीकरण के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया गया।
इससे लाभ होंगे—
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किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि
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मखाना की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार
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प्रसंस्करण उद्योग का विस्तार
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बेहतर बाजार उपलब्धता
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वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती
बोर्ड ने सभी राज्यों और संस्थानों से कहा कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्ययोजनाओं को जमीन पर उतारें ताकि मखाना उद्योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिले।
पृष्ठभूमि: प्रधानमंत्री ने सितंबर 2025 में किया था बोर्ड का शुभारंभ
केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में किए गए वादे के अनुरूप राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया।
प्रधानमंत्री ने 15 सितंबर 2025 को बिहार में इसका औपचारिक उद्घाटन किया था।
भारत दुनिया में मखाने का सबसे बड़ा उत्पादक है और इस बोर्ड का गठन इस क्षेत्र को व्यवस्थित, आधुनिक और वैश्विक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
