सस्टेनेबिलिटी, सहकार और विज्ञान का संगम: भारतीय डेयरी की समग्र दृष्टि
अहमदाबाद -नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (GTU) एवं Nature First द्वारा आयोजित ‘Climate | Carbon | Coastlines’ विषयक संगोष्ठी में सस्टेनेबिलिटी को भारतीय संस्कृति, सहकारी आंदोलन और आधुनिक विज्ञान से जोड़ते हुए एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। अपने व्याख्यान में उन्होंने डेयरी क्षेत्र को आजीविका, पोषण सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन का मजबूत स्तंभ बताया।
डेयरी: आजीविका, पोषण और पर्यावरण का आधार !!
डॉ. शाह ने कहा कि पशुपालन और कृषि एक-दूसरे के पूरक हैं। भारत की लैक्टो-वेजिटेरियन आबादी के लिए डेयरी, एनिमल प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। योजनाबद्ध कार्यक्रमों और तकनीकी हस्तक्षेपों के कारण देश में दूध उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन चुका है।
सहकारी आंदोलन से डेयरी क्रांति तक !!
अपने संबोधन में डॉ. शाह ने सरदार वल्लभभाई पटेल के सहकारी विज़न और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से प्रेरित ऑपरेशन फ्लड को भारतीय डेयरी क्रांति की नींव बताया। उन्होंने कहा कि सहकारिता ने छोटे किसानों को संगठित कर उन्हें बाजार से जोड़ा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार दिया।
गोबर से ग्रीन एनर्जी तक !!
डॉ. शाह ने गोबर को एक मूल्यवान संसाधन बताते हुए जैविक उर्वरक, केंद्रीकृत एवं विकेंद्रीकृत बायोगैस मॉडल और कार्बन क्रेडिट की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाया। वाराणसी मिल्क यूनियन का केंद्रीकृत बायोगैस आधारित ऊर्जा उत्पादन मॉडल और बनास डेयरी का बायो-सीएनजी परिवहन मॉडल इसके अनुकरणीय उदाहरण बताए। उन्होंने एनडीडीबी की सहायक कंपनी एनडीडीबी मृदा लिमिटेड तथा सुजुकी आर एंड डी सेंटर इंडिया (SRDI) के साथ साझेदारी में संचालित गोबर आधारित बायोगैस और बायो-सीएनजी पहलों पर भी प्रकाश डाला।
अनुसंधान और स्वदेशी तकनीक से बढ़ी उत्पादकता !!
डॉ. शाह ने बताया कि फ़ीडस्टॉक अनुसंधान और चारा विकास जैसी आधुनिक तकनीकों ने डेयरी उत्पादकता को नई दिशा दी है। साथ ही, एनडीडीबी द्वारा स्वदेशी तकनीक से विकसित सेक्स-सॉर्टेड सीमन और स्वदेशी जीनोमिक चिप की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इनका लोकार्पण माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।
वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप भारतीय पहल !!
उन्होंने पेरिस समझौते और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप एनडीडीबी के प्रयासों को रेखांकित किया। जैविक उर्वरकों पर सरकारी सब्सिडी और सीएनजी में 2 प्रतिशत कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) मिश्रण नीति को उन्होंने भारत सरकार का प्रगतिशील और दूरदर्शी कदम बताया। 
शोध और नवाचार का आह्वान !!
अंत में, डॉ. शाह ने शोधकर्ताओं और उद्यमियों से डेयरी क्षेत्र, सर्कुलर बिज़नेस मॉडल और क्लाइमेट-फ्रेंडली इनोवेशन पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सस्टेनेबिलिटी और समृद्धि एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। सही नीतियों, उपयुक्त तकनीक और मजबूत सहकारी ढांचे के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा सकता है।
