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वाटरशेड महोत्सव-2026 में जल बचाने का संकल्प!

जल संरक्षण हमारी सांस्कृतिक विरासत, इसे जनआंदोलन बनाना जरूरी: कृषि मंत्री रामकृपाल यादव पटना –बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि जल संचयन, जल संरक्षण और भूमि संरक्षण सदियों से हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। पानी के बिना न तो मानव जीवन संभव है और न ही प्रकृति व सभ्यता का […]

जल संरक्षण हमारी सांस्कृतिक विरासत, इसे जनआंदोलन बनाना जरूरी: कृषि मंत्री रामकृपाल यादव

पटनाबिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि जल संचयन, जल संरक्षण और भूमि संरक्षण सदियों से हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। पानी के बिना न तो मानव जीवन संभव है और न ही प्रकृति व सभ्यता का अस्तित्व।

राज्यस्तरीय वाटरशेड महोत्सव-2026 का आयोजन

कृषि मंत्री शुक्रवार को राज्यस्तरीय वाटरशेड महोत्सव-2026 को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत नदियों का देश है और बिहार नदियों का राज्य। हमारी सांस्कृतिक परंपराओं में नदी, तालाब, कुआं, पेड़ और धरती को पूजनीय माना गया है। पंचतत्व—पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश—पर आधारित भारतीय दर्शन प्रकृति संरक्षण को हमारी सांस्कृतिक विरासत के रूप में स्थापित करता है।

पीएमकेएसवाई के तहत 35 परियोजनाएं, 440 करोड़ की स्वीकृति

यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कृषि विभाग के भूमि संरक्षण निदेशालय द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) वाटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट 2.0 के तहत दक्षिण बिहार के 17 जिलों और उत्तर बिहार के बेगूसराय सहित कुल 18 वर्षा-आश्रित जिलों में 35 परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
इस पंचवर्षीय योजना के लिए भारत सरकार द्वारा 440 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

जल संरचनाओं का व्यापक विकास

योजना के अंतर्गत अब तक 496 हेक्टेयर में पौधारोपण, 282 पक्के चेक डैम, 62 खेत तालाब, 361 जल संचयन तालाब, 756 आहर-पईन का जीर्णोद्धार तथा 344 कुओं का निर्माण/जीर्णोद्धार किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि नए वित्तीय वर्ष में पीएमकेएसवाई 3.0 की शुरुआत होगी।

भू-क्षरण से प्रभावित नौ लाख हेक्टेयर भूमि

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में लगभग नौ लाख हेक्टेयर भूमि भू-क्षरण से प्रभावित है। इसे रोकने के लिए जल-जीवन-हरियाली मिशन के तहत तालाबों और आहर-पईन की उड़ाही, सौंदर्यीकरण, पौधारोपण तथा जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त किया गया है।
उन्होंने गंगा जल को पाइपलाइन के माध्यम से नालंदा, राजगीर, गया और नवादा तक पहुंचाने को जल प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

कृषि में जल का वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी

यादव ने बताया कि भारत में विश्व का लगभग चार प्रतिशत शुद्ध जल उपलब्ध है, जिसमें से 80 प्रतिशत जल का उपयोग कृषि में होता है। ऐसे में कृषि के लिए जल का वैज्ञानिक और विवेकपूर्ण प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।

‘फोर-आर’ और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ से नई दिशा

कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “फोर-आर” (Reduce, Reuse, Recharge, Recycle) और “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियानों से जल संरक्षण को नई दिशा मिली है। उन्होंने युवाओं और जीविका दीदियों से आह्वान किया कि वे जनभागीदारी के माध्यम से जल संचयन और संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं।

भूमि संरक्षण पर विशेष जोर!

इस अवसर पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि मानव जीवन में भूमि की भूमिका जन्म से मृत्यु तक अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मृदा की ऊपरी परत को अमूल्य पूंजी बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि उर्वर मृदा के संरक्षण के लिए दीर्घकालीन दृष्टिकोण के साथ योजनाबद्ध प्रयास जरूरी हैं और विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव भूमि संरक्षण को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रभावी पहल साबित होगा।

चित्र: सौजन्य सोशल मीडिया