🌾 मेघालय में आदिवासी महिला किसानों को मिली नई ताकत: बायोफोर्टिफाइड धान व आधुनिक खेती का प्रशिक्षण
📍 उमियम (मेघालय) –देश में पोषण-सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक अहम पहल के तहत ICAR-भारतीय धान अनुसंधान संस्थान (IIRR), हैदराबाद और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, उमियम के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम CRP बायोफोर्टिफिकेशन TSP घटक के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण को कम करना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।
👩🌾 महिला किसानों को मिला उन्नत बीज और आधुनिक उपकरण
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी महिला किसानों को एक-एक किलो DRR धान 48 (बायोफोर्टिफाइड चावल) वितरित किया गया। इसके साथ ही उन्हें मिट्टी परीक्षण किट, कुदाल, फावड़े, जैव उर्वरक, मशरूम उत्पादन किट और विभिन्न सब्जियों के बीज भी दिए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बायोफोर्टिफाइड धान पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो न केवल स्वास्थ्य सुधार में मदद करता है बल्कि बाजार में बेहतर कीमत भी दिला सकता है।
🧪 मिट्टी परीक्षण और वैज्ञानिक खेती का दिया गया प्रशिक्षण
कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी परीक्षण किट के उपयोग का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया। इससे किसान अपनी भूमि की उर्वरता को समझकर सही मात्रा में खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा।
🍄 मशरूम उत्पादन से अतिरिक्त आय के अवसर
इसके अलावा, किसानों को मशरूम उत्पादन की तकनीकों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कम लागत और कम जगह में मशरूम उत्पादन एक बेहतर आय का वैकल्पिक स्रोत बन सकता है, खासकर महिला किसानों के लिए।
🌱 बायोफोर्टिफाइड फसलों से पोषण और आय दोनों में सुधार
कार्यक्रम के दौरान किसानों को बायोफोर्टिफाइड धान की विशेषताओं के बारे में जागरूक किया गया। यह धान विटामिन और खनिजों से समृद्ध होता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।
📊 कृषि विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम आदिवासी क्षेत्रों में सतत कृषि और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकता है।
📌 सारांश
मेघालय के उमियम में आयोजित यह पहल न केवल महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह देश में पोषण-सुरक्षा और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का भी एक प्रभावी उदाहरण है।
चित्र: सौजन्य IIRR सोशल मी़डिया

