• Home  
  • अमलाहा से दलहन क्रांति का आगाज़, भारत बनेगा दालों का निर्यातक!
- कृषि समाचार

अमलाहा से दलहन क्रांति का आगाज़, भारत बनेगा दालों का निर्यातक!

अमलाहा से देशव्यापी दलहन क्रांति का आगाज़ शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को मिली नई दिशा नई दिल्ली/सीहोर –मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से शनिवार को देश की कृषि नीति को नई दिशा मिली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास […]

अमलाहा से देशव्यापी दलहन क्रांति का आगाज़

शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को मिली नई दिशा
नई दिल्ली/सीहोर –मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से शनिवार को देश की कृषि नीति को नई दिशा मिली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति बैठक के साथ ही देशव्यापी दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन को भारत को दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक पहल माना जा रहा है।

इस अवसर पर एक ही मंच पर केंद्र और राज्यों के कृषि मंत्री, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री, विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, शीर्ष कृषि वैज्ञानिक, ICAR एवं ICARDA के विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, किसान उत्पादक संगठन (FPO), बीज कंपनियाँ और दाल मिल उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे। दिनभर चले इस मंथन में नीति, शोध, उत्पादन, प्रोसेसिंग और बाज़ार—सभी पहलुओं पर गहन चर्चा हुई।

“बीज से बाज़ार तक” पूरी वैल्यू चेन पर सरकार का फोकस

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सरकार का दृष्टिकोण केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बीज से लेकर बाज़ार तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना ही दलहन आत्मनिर्भरता की कुंजी है।
उन्होंने कहा कि जब तक किसान को बेहतर बीज, उन्नत तकनीक, उचित समर्थन मूल्य और बाज़ार तक सीधी पहुँच नहीं मिलेगी, तब तक दलहन क्षेत्र में स्थायी सुधार संभव नहीं है।

दालों का आयात शर्म की बात, भारत बनेगा निर्यातक देश

दलहन पैदावार को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कड़े शब्दों में अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा, “दालें हमें विदेशों से मंगानी पड़ें, यह हमारे लिए गर्व का विषय नहीं बल्कि शर्म की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि भारत दलहन में आत्मनिर्भर बने और आने वाले वर्षों में दालों का निर्यातक देश बने।”

उन्होंने बताया कि वर्तमान में दलहन उपज में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, लेकिन इसके बावजूद दलहन का रकबा घट रहा है। सरकार की कोशिश है कि दलहन की खेती किसानों के लिए अधिक लाभकारी बने, ताकि किसान स्वेच्छा से दलहन की ओर आकर्षित हों।

राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का रोडमैप

बैठक में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस मिशन के अंतर्गत—

  • दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए क्लस्टर मॉडल अपनाया जाएगा

  • किसानों को संगठित कर आधुनिक खेती तकनीक से जोड़ा जाएगा

  • बीज, उर्वरक, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता एक साथ उपलब्ध कराई जाएगी

  • दलहन फसलों की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया जाएगा

क्लस्टर मॉडल और 1,000 दाल मिलों की स्थापना

किसानों को मूल्य संवर्धन का सीधा लाभ दिलाने के लिए सरकार ने बड़ी घोषणा की।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर में 1,000 दाल मिलें स्थापित की जाएँगी।
दाल मिल लगाने पर भारत सरकार की ओर से ₹25 लाख तक की सब्सिडी दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि जहाँ दलहन का उत्पादन होगा, वहीं उसकी प्रोसेसिंग और बिक्री होगी, जिससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे। मध्य प्रदेश में ही 55 दाल मिलें विभिन्न क्लस्टरों में स्थापित की जाएँगी, जिससे प्रदेश के किसानों और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोज़गार मिलेगा।

बीज व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव

बीज सुधार को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने एक अहम निर्णय की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि अब कोई भी बीज दिल्ली में बैठकर रिलीज़ नहीं किया जाएगा
नए बीज सीधे राज्यों और क्लस्टरों में किसानों के बीच जाकर जारी किए जाएँगे।

इसके तहत—

  • क्लस्टर के किसानों को बीज किट उपलब्ध कराई जाएगी

  • आदर्श खेती के लिए एक हेक्टेयर पर ₹10,000 की सहायता दी जाएगी

  • बीज ग्राम की अवधारणा को बढ़ावा दिया जाएगा

शोध से किसान तक की कड़ी मज़बूत, FLRP कैंपस का उद्घाटन

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने अमलाहा स्थित अत्याधुनिक FLRP (Food Legume Research Platform) कैंपस का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि ICAR, ICARDA और FLRP के वैज्ञानिक मसूर, चना, मूंग, उड़द सहित अन्य दलहनी फसलों की—

  • उच्च उत्पादक किस्में

  • जल्दी पकने वाली प्रजातियाँ

  • रोग-प्रतिरोधी बीज

विकसित करने पर युद्धस्तर पर कार्य कर रहे हैं, ताकि किसानों की लागत घटे और मुनाफा बढ़े।

अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर विपक्ष को जवाब

अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर उठ रही राजनीतिक बहस पर शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा फैलाया जा रहा यह भ्रम कि इन समझौतों से किसान बर्बाद हो जाएगा, पूरी तरह निराधार है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मक्का, गेहूँ, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल, तंबाकू और कई संवेदनशील कृषि व डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं और इनका आयात नहीं होगा।

किसानों की ओर से प्रधानमंत्री को धन्यवाद

केंद्रीय कृषि मंत्री ने मंच से कहा कि हालिया अंतरराष्ट्रीय समझौते भारत के निर्यात, MSME और युवाओं के लिए नए अवसर खोलेंगे।
उन्होंने भारत के किसानों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार और अभिनंदन व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।

अमलाहा से गया स्पष्ट संदेश

अमलाहा में हुई इस राष्ट्रीय बैठक से यह संदेश साफ़ गया कि—

  • किसान हित सर्वोपरि हैं

  • दलहन आत्मनिर्भरता अब केवल नीति नहीं, बल्कि ज़मीनी क्रियान्वयन का विषय है

  • शोध, नीति, MSP, बीज सुधार और बाज़ार—सभी को जोड़कर ही आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य हासिल किया जाएगा

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के इस नए अध्याय के साथ भारत दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर सशक्त भूमिका निभाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।