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ग्लोबल खाद्य सुरक्षा की कुंजी हैं छोटे किसान: IFAD

खाद्य मूल्य शृंखला का पहला मील बदलेगा दुनिया की तस्वीर! रोम –विश्व आर्थिक मंच (WEF)  अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) के अध्यक्ष अल्वारो लारियो और IFAD की गुडविल एंबेसडर सबरीना धौरे एल्बा ने वैश्विक नेताओं और उद्योग जगत के शीर्ष अधिकारियों को एक सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि खाद्य मूल्य शृंखला के ‘पहले मील’ […]

खाद्य मूल्य शृंखला का पहला मील बदलेगा दुनिया की तस्वीर!

रोम –विश्व आर्थिक मंच (WEFअंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) के अध्यक्ष अल्वारो लारियो और IFAD की गुडविल एंबेसडर सबरीना धौरे एल्बा ने वैश्विक नेताओं और उद्योग जगत के शीर्ष अधिकारियों को एक सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि खाद्य मूल्य शृंखला के ‘पहले मील’ पर छोटे किसानों और ग्रामीण उद्यमियों में निवेश करना न केवल विकास की आवश्यकता है, बल्कि यह एक बड़ी रणनीतिक और आर्थिक अवसर भी है, जो समृद्धि, लचीलापन और वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है।

छोटे किसानों में निवेश: ‘ट्रिपल विन’ रणनीति

IFAD अध्यक्ष अल्वारो लारियो ने कहा,
छोटे खाद्य उत्पादकों और ग्रामीण उद्यमियों में निवेश एक ‘ट्रिपल विन’ है—यह आर्थिक विकास और रोजगार सृजन करता है, नए व्यावसायिक अवसर खोलता है और स्थिरता को मजबूत करता है। सरकारों, निवेशकों और व्यवसायों के लिए सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्थाएं केवल विकास की प्राथमिकता नहीं, बल्कि बढ़ती जलवायु, पर्यावरणीय और भू-राजनीतिक अस्थिरताओं के दौर में वैश्विक खाद्य मूल्य शृंखलाओं के लिए एक भू-रणनीतिक अनिवार्यता हैं।”

ग्लोबल खाद्य सुरक्षा में छोटे किसानों की भूमिका

दुनिया के कुल खाद्य उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा छोटे किसान पैदा करते हैं। यदि उनकी जलवायु सहनशीलता और उत्पादकता को समर्थन नहीं मिला, तो इससे न केवल स्थानीय आजीविका और ग्रामीण विकास प्रभावित होगा, बल्कि वैश्विक जिंस बाजारों में अस्थिरता, खाद्य कीमतों में वृद्धि और खाद्य आयात पर निर्भर देशों के लिए आयात बिल बढ़ने का खतरा भी पैदा होगा। इससे सामाजिक अस्थिरता भी गहरा सकती है।

निजी निवेश को आकर्षित करने पर जोर

लारियो ने कहा कि सार्वजनिक और रियायती वित्त का उपयोग कर निजी पूंजी को ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं में आकर्षित करने की रफ्तार बढ़ानी होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया, “निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी कोई विकल्प नहीं, बल्कि सतत और समावेशी विकास, लचीलापन और दीर्घकालिक प्रगति का उत्प्रेरक है।”

जोखिम कम करने वाले निवेश मॉडल

WEF में IFAD अध्यक्ष यह बताएंगे कि किस प्रकार निवेश प्लेटफॉर्म, गारंटी साधन और ‘फर्स्ट-ट्रेंच लॉस’ वाले इम्पैक्ट फंड जैसे जोखिम-न्यूनन (डी-रिस्किंग) समाधान ग्रामीण क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं।

खाद्य प्रणाली परिवर्तन में अपार आर्थिक संभावना

खाद्य प्रणालियों का रूपांतरण 2030 तक प्रति वर्ष 4.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक के व्यावसायिक अवसर पैदा कर सकता है। बढ़ती वैश्विक खाद्य मांग के बीच केवल अफ्रीका में ही खाद्य और पेय बाजार 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

ग्रामीण निवेश से रोजगार और आय में वृद्धि

ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं में निवेश से खाद्य उत्पादन बढ़ता है, मूल्य शृंखलाएं मजबूत होती हैं, किसानों की आय में वृद्धि होती है और नए रोजगार अवसर सृजित होते हैं।
IFAD के अनुभव बताते हैं कि उसके वित्तपोषित परियोजनाओं में शामिल प्रतिभागियों की आय में औसतन 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उत्पादन और बाजार तक पहुंच में 35 प्रतिशत का इजाफा हुआ। 2022 से 2024 के बीच IFAD समर्थित परियोजनाओं से लगभग 3.9 लाख नौकरियां सृजित हुईं।

स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा का आधार

गरीबी, जलवायु झटकों के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक बहिष्करण जैसे अस्थिरता के मूल कारणों को संबोधित कर छोटे किसानों में निवेश वैश्विक सुरक्षा को भी मजबूत करता है। इससे संघर्षों में कमी आती है, स्थायी शांति के हालात बनते हैं और प्रवासन के विकल्प पैदा होते हैं।
IFAD के शोध के अनुसार, इथियोपिया में भूमि उत्पादकता बढ़ने से संघर्षों में उल्लेखनीय कमी आई, जबकि माली में IFAD निवेश वाले क्षेत्रों में संघर्षों में 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

कम निवेश की चुनौती

हालांकि छोटे किसान और ग्रामीण उद्यमी स्थानीय व वैश्विक खाद्य प्रणालियों की रीढ़ हैं, फिर भी वे अक्सर गरीबी और आत्मनिर्भर खेती के दायरे में फंसे रहते हैं। हाल के वर्षों में आधिकारिक विकास सहायता के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों को केवल 10 अरब अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष मिल पाए हैं, जो आवश्यकता से कहीं कम हैं और 2025 में इसके और घटने का अनुमान है। वहीं, रोजगार सृजन की बड़ी क्षमता रखने वाले ग्रामीण लघु एवं मध्यम उद्यम (SMEs) आज भी वित्तीय संस्थानों से पर्याप्त सहयोग से वंचित हैं।

सारांश

IFAD ने स्पष्ट किया कि छोटे किसानों और ग्रामीण उद्यमियों में समय पर और पर्याप्त निवेश न केवल खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा की दिशा में भी एक निर्णायक कदम है।