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CSC के माध्यम से पशुपालकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम, SSS तकनीक अब सस्ती

पशुपालकों के लिए डिजिटल ज्ञान, CSC से सीधे जुड़ा मंत्रालय कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में पशुपालकों के लिए वर्चुअल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित✍️ नई दिल्ली -देशभर में पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने एक विशेष […]

पशुपालकों के लिए डिजिटल ज्ञान, CSC से सीधे जुड़ा मंत्रालय

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में पशुपालकों के लिए वर्चुअल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

✍️ नई दिल्ली -देशभर में पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने एक विशेष वर्चुअल जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से पश्चिमी और दक्षिणी भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ आयोजित किया गया।

इस वर्चुअल कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने की। कार्यक्रम में विभाग की सचिव श्रीमती अल्का उपाध्याय ने भी भाग लिया और पशुपालकों को उपयोगी जानकारियां प्रदान कीं।

SSS की कीमत में भारी कटौती से किसानों को बड़ा लाभ: प्रो. बघेल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. बघेल ने कहा कि यह पहल पशुपालकों से सीधे संवाद करने और उन्हें जमीनी स्तर पर वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने का एक बड़ा प्रयास है। उन्होंने Sex Sorted Semen (SSS) तकनीक का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है और अब इसकी कीमतों में भारी कमी की गई है, जिससे यह तकनीक किसानों के लिए और भी किफायती हो गई है।

उन्होंने कहा,

“SSS तकनीक अब हर किसान की पहुंच में होगी। इससे पशुधन की गुणवत्ता में सुधार होगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। यह ‘प्रयोगशाला से खेत’ तक ज्ञान पहुंचाने का सबसे बेहतरीन माध्यम है।”

उन्होंने विभिन्न राज्यों के पशुपालकों से संवाद करते हुए उनके पशुधन, पशु चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता, और केंद्र की योजनाओं के प्रति उनकी जागरूकता की जानकारी ली।

समय पर टीकाकरण और नस्ल सुधार पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभाग की सचिव श्रीमती अल्का उपाध्याय ने कहा कि पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए समय पर टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि देश में ज़ूनोटिक रोगों — जैसे ब्रुसेलोसिस और एंथ्रेक्स — के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए पशुपालकों को सतर्क और जागरूक रहना चाहिए।

उन्होंने कहा,

“ज़ूनोटिक रोग न केवल पशुओं बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकते हैं। इनके रोकथाम के लिए नियमित टीकाकरण और स्वच्छता का पालन अत्यावश्यक है।”

उन्होंने नस्ल सुधार कार्यक्रमों की भी जानकारी दी और किसानों को उन्नत तकनीकों जैसे IVF, ET, और SSS अपनाने के लिए प्रेरित किया।

देशभर के 1 लाख से अधिक पशुपालकों ने लिया भाग

यह कार्यक्रम देश के गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, तमिलनाडु, गोवा, पुडुचेरी, दमन और दीव, तथा दादरा और नगर हवेली जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,000 से अधिक CSC केंद्रों के माध्यम से आयोजित किया गया। इसमें 1 लाख से अधिक पशुपालकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर SSS तकनीक, पशुओं के लिए नियमित टीकाकरण, पशु स्वच्छता, ज़ूनोटिक रोगों की पहचान व रोकथाम, और सरकारी योजनाओं की जानकारी पर विशेषज्ञों के सत्र, शैक्षणिक वीडियो और इंटरएक्टिव सत्र आयोजित किए गए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पशुपालन में नवाचार का प्रयास

इस पहल के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करके पशुपालकों तक सीधे जानकारी पहुंचाने और आधुनिक तकनीकों को गांवों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं था, बल्कि किसानों को प्रशिक्षण, प्रेरणा, और सशक्तिकरण भी प्रदान करना था, जिससे वे अपने पशुपालन व्यवसाय को और बेहतर बना सकें।

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