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बिहार के उत्पादों को मिला ग्लोबल मंच

🌾 बिहार में पहली IBSM बैठक: कृषि उत्पादों को मिला वैश्विक मंच 🌍 लोकल टू ग्लोबल’ की ओर बढ़ा बिहार पटना, 21 मई – बिहार की राजधानी पटना स्थित ज्ञान भवन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता बैठक (IBSM) का सफल आयोजन हुआ। यह पहला अवसर था जब खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने बिहार सरकार, एपीडा […]

🌾 बिहार में पहली IBSM बैठक: कृषि उत्पादों को मिला वैश्विक मंच

🌍 लोकल टू ग्लोबल’ की ओर बढ़ा बिहार

पटना, 21 मई – बिहार की राजधानी पटना स्थित ज्ञान भवन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता बैठक (IBSM) का सफल आयोजन हुआ। यह पहला अवसर था जब खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने बिहार सरकार, एपीडा (APEDA) और टीपीसीआई (TPCI) के सहयोग से इस प्रकार की उच्च स्तरीय व्यापारिक बैठक राज्य में आयोजित की।

इस आयोजन ने राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को पहली बार वैश्विक खरीदारों से सीधे जोड़ने का अवसर दिया, जो कि बिहार के कृषि-आधारित निर्यात को नई दिशा देने वाला साबित हुआ।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने किया उद्घाटन

बैठक का उद्घाटन केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने किया। उन्होंने इस मंच को “आर्थिक पुनरुत्थान की दिशा में एक निर्णायक कदम” बताते हुए कहा कि बिहार के युवा अब रोजगार चाहने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बन सकते हैं।

बिहार की ज्ञान परंपरा अब ग्लोबल कृषि-खाद्य अर्थव्यवस्था में इसकी भागीदारी को नई शक्ति दे रही है,” —  पासवान

उन्होंने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और बिहार को एक विकसित राज्य के रूप में प्रस्तुत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

✈️  20 देशों से पहुंचे 70+ वैश्विक खरीदार, 500 से अधिक B2B मीटिंग्स

इस भव्य आयोजन में यूएई, सिंगापुर, जापान, घाना, स्पेन, जर्मनी और यूके सहित 20 देशों से 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, 50 घरेलू और 20 संस्थागत खरीदारों की भी सक्रिय भागीदारी रही।

कार्यक्रम के दौरान 500 से अधिक संरचित B2B बैठकों का आयोजन हुआ, जिसमें बिहार के प्रमुख कृषि उत्पादों — जैसे:

  • जीआई टैग प्राप्त मखाना (फॉक्स नट)

  • शाही लीची

  • जर्दालू आम

  • कतरनी चावल

को वैश्विक खरीदारों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इससे निर्यात के नए द्वार खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

🥭 बिहार के पारंपरिक उत्पादों को मिली नई पहचान

इस बैठक में कई उत्पादों को विशेष रुचि मिली। पश्चिम अफ्रीका के खरीदारों ने ‘सत्तू’ में रुचि दिखाई, जो एक पारंपरिक उच्च-प्रोटीन खाद्य पदार्थ है। वहीं, सिंगापुर की कंपनियों ने लीची और आम की आपूर्ति पर विचार किया।

एयरलाइनों और रेलवे कैटरिंग कंपनियों ने मखाना, चावल और दाल जैसे उत्पादों को अपनी सेवाओं में शामिल करने की संभावना पर चर्चा की। इससे राज्य के किसानों और प्रसंस्करणकर्ताओं को स्थायी बाजार मिल सकता है।

✅ यूएई की लुलु ग्रुप के साथ एमओयू: बिहार की लीची को मिलेगा ग्लोबल बज़ार

इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा — एपीडा, बिहार सरकार और यूएई स्थित लुलु ग्रुप के बीच हुआ समझौता ज्ञापन (MoU)। इसका उद्देश्य बिहार की प्रसिद्ध लीची के निर्यात को बढ़ावा देना है।

इस समझौते से राज्य के बागवानी उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहुंच बनाने का रास्ता साफ होगा।

📈 तकनीकी सत्रों और विशेषज्ञ पैनलों से उद्यमियों को मिला मार्गदर्शन

IBSM सिर्फ एक व्यापार मंच नहीं था, बल्कि यह स्थानीय उद्यमियों, SHG और MSME के लिए शिक्षा और जागरूकता का मंच भी बना।

खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय, APEDA, NIFTEM, ICRIER, EXIM बैंक, Startup India और भारतीय पैकेजिंग संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने विषय विशेषज्ञों द्वारा सत्र आयोजित किए, जिनमें चर्चा की गई:

  • मूल्य शृंखला विकास

  • उन्नत पैकेजिंग तकनीक

  • जैविक प्रमाणीकरण

  • निर्यात की औपचारिकताएं

  • स्टार्टअप्स को मिलने वाली सरकारी सहायता

विशेष रूप से पीएमएफएमई योजना पर जोर दिया गया, जिसके तहत 2024-25 में देशभर में सबसे अधिक इकाइयां बिहार में स्वीकृत की गई हैं।

120 से अधिक स्टॉल्स वाली प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

बैठक के साथ-साथ आयोजित प्रदर्शनी में 120 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें बिहार के एफपीओ, महिला नेतृत्व वाले एसएचजी, स्थानीय स्टार्टअप और कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड शामिल रहे।

यह प्रदर्शनी बिहार की कृषि-खाद्य क्षमता, नवाचार और वैश्विक महत्वाकांक्षा का जीवंत उदाहरण बनी।

🚀  IBSM: बिहार को वैश्विक मंच देने वाला मॉडल आयोजन

इस कार्यक्रम ने दिखा दिया कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कार्य करें, तो सहकारी संघवाद के जरिए क्षेत्रीय विकास को कैसे एक नई ऊंचाई दी जा सकती है।

आईबीएसएम केवल एक व्यापार कार्यक्रम नहीं था, यह ‘स्थानीय से वैश्विक’ के भारत के दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है। इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि स्थानीय किसान और उद्यमी, जब वैश्विक खरीदारों से जुड़ते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय मूल्य श्रृंखला में खुद को स्थापित कर सकते हैं।

सारांश:

बिहार अब सिर्फ अतीत की सभ्यता नहीं, भविष्य का कृषि व्यापार केंद्र बन रहा है। मजबूत उत्पादन आधार, नीति समर्थन और अब वैश्विक संपर्कों के साथ बिहार भारत के वैश्विक खाद्य निर्यात में एक निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।

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