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अमेरिका पहुंची भारतीय अनार की पहली समुद्री खेप

भारतीय किसानों को मिलेगा अमेरिकी बाज़ार से सीधा लाभ भारत के ताजे फलों के निर्यात क्षेत्र ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर छू लिया है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से 14 टन ‘भगवा’ किस्म के उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय अनार की पहली वाणिज्यिक समुद्री […]

भारतीय किसानों को मिलेगा अमेरिकी बाज़ार से सीधा लाभ

भारत के ताजे फलों के निर्यात क्षेत्र ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर छू लिया है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से 14 टन ‘भगवा’ किस्म के उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय अनार की पहली वाणिज्यिक समुद्री खेप अमेरिका के न्यूयॉर्क सफलतापूर्वक पहुंच गई है।

यह पहल भारतीय अनार को दूरदराज के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। समुद्री मार्ग से यह खेप लगभग पांच सप्ताह की यात्रा के बाद अमेरिका के पूर्वी तट पर मार्च के दूसरे सप्ताह में पहुंची, जहां इसे “उत्कृष्ट गुणवत्ता” का दर्जा मिला और उपभोक्ताओं ने इसकी स्वादिष्टता की सराहना की।

महंगे हवाई परिवहन से सस्ता समुद्री मार्ग की ओर बदलाव
प्रतीकात्मक चित्र

परंपरागत रूप से ताजे फलों के निर्यात के लिए हवाई परिवहन को प्राथमिकता दी जाती रही है, लेकिन हाल के समय में लागत कम करने और दीर्घकालिक टिकाऊ समाधान की तलाश में समुद्री मार्ग को अपनाया गया है। इस पहल से भारतीय अनार अब अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं।

वैज्ञानिक सहयोग से सफलता की नींव

भारत को 2023 में अमेरिका ने अनार के लिए बाजार पहुंच प्रदान की थी, जिसके बाद एपीडा ने USDA-APHIS, भारतीय राष्ट्रीय पादप संरक्षण संगठन (NPPO) और सोलापुर स्थित राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केंद्र (NRCP) के सहयोग से हवाई मार्ग से परीक्षण खेप भेजी थी। इसके बाद, अनार की ताजगी बनाए रखने के लिए किए गए स्थैतिक परीक्षणों के सफल परिणामों के आधार पर फरवरी 2024 में पहली समुद्री परीक्षण खेप भेजी गई थी।

नियामकीय सहूलियतों से खुला निर्यात का मार्ग

दिसंबर 2024 में, अमेरिका के USDA द्वारा ‘पहले से ही अनापत्ति कार्यक्रम’ की स्वीकृति से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली। इस प्रक्रिया के तहत, USDA निरीक्षकों को तीन माह पहले भारत बुलाने की एपीडा की रणनीति ने निर्यात की सुगमता सुनिश्चित की।

इस ऐतिहासिक समुद्री खेप को एपीडा में पंजीकृत निर्यातक के बी एक्सपोर्ट्स द्वारा भेजा गया। अनार सीधे उनके खेतों से प्राप्त किए गए ताकि किसानों को लाभ सीधे मिल सके।

किसानों से लेकर बाजार तक: सबको मिला लाभ

एपीडा अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा, “भारत सरकार वैश्विक बाजारों में भारतीय ताजे फलों को स्थापित करने में सक्रिय रही है। समुद्री खेप का सफल परीक्षण भविष्य में अनार के निर्यात को बढ़ावा देगा, जैसे कि आम के वार्षिक निर्यात में पहले ही देखा जा चुका है।”

के बी एक्सपोर्ट्स के सीईओ श्री कौशल खाखर ने भी एपीडा की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, “भारतीय अनार की वैश्विक पेशकश में हमने उच्च गुणवत्ता के साथ अमेरिका जैसे प्रमुख बाजार में पहुंच बनाई है।”

निर्यात में आई तेजी

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 69.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के 72,011 मीट्रिक टन अनार का निर्यात किया। वहीं, 2024-25 की अप्रैल से जनवरी की अवधि में निर्यात में 21% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसका मूल्य 59.76 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।

प्रमुख उत्पादक राज्य और निर्यात गंतव्य

महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और आंध्र प्रदेश अनार के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। प्रमुख निर्यात गंतव्यों में यूएई, बांग्लादेश, नेपाल, नीदरलैंड, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, बहरीन, ओमान और अब अमेरिका शामिल हैं।

स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट: ‘भगवा’ की वैश्विक पहचान

भारतीय ‘भगवा’ किस्म के अनार अपने गहरे लाल रंग, मिठास और पोषण से भरपूर गुणों के कारण दुनियाभर में स्वास्थ्य जागरूक उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय होते जा रहे हैं।

भविष्य की योजनाएं

भारतीय निर्यात संघ और अन्य हितधारकों ने एपीडा से आने वाले वर्षों में व्यापक प्रचार अभियान चलाने की मांग की है, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को भारतीय अनार की गुणवत्ता और पाक उपयोगों के बारे में जागरूक किया जा सके।

एपीडा ने पहले ही अनार के लिए निर्यात संवर्धन मंच (EPF) की स्थापना की है, जिसमें केंद्र, राज्य सरकारों और प्रमुख निर्यातकों को जोड़ा गया है ताकि निर्यात बाधाओं को दूर कर आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ किया जा सके।

सारांश

भारत की यह पहल न केवल वैश्विक मंच पर देश की उपस्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि किसानों को सीधे लाभ पहुंचाकर एक स्थायी और समावेशी कृषि निर्यात प्रणाली की ओर अग्रसर है। अगर यह गति बनी रही, तो भारतीय अनार जल्द ही अमेरिकी खुदरा बाजार में अपनी स्थायी जगह बना लेंगे।

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