Krishi Times Header
लोड हो रहा है...  |  Krishi Times
  • Home  
  • कम लागत में ज्यादा मुनाफा, गिलोय की खेती से संभव!
- कृषि समाचार

कम लागत में ज्यादा मुनाफा, गिलोय की खेती से संभव!

औषधीय गुणों से भरपूर गिलोय: किसान और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी कम लागत में अधिक मुनाफा, गिलोय की खेती बन रही किसानों की पसंद पूसा (समस्तीपुर) — गिलोय (Tinospora cordifolia), जिसे आयुर्वेद में “अमृता” और “गुडुची” के नाम से जाना जाता है, न केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली श्रेष्ठ औषधियों में शामिल है, […]

औषधीय गुणों से भरपूर गिलोय: किसान और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी

कम लागत में अधिक मुनाफा, गिलोय की खेती बन रही किसानों की पसंद

प्रो. (डॉ.) एस. के. सिंह

पूसा (समस्तीपुर)गिलोय (Tinospora cordifolia), जिसे आयुर्वेद में “अमृता” और “गुडुची” के नाम से जाना जाता है, न केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली श्रेष्ठ औषधियों में शामिल है, बल्कि यह किसानों के लिए कम लागत में अधिक लाभ कमाने का सशक्त साधन भी बन रही है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और हर्बल उत्पादों की मांग के कारण देश-विदेश में गिलोय की खेती का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।

औषधीय महत्व और उपयोग

गिलोय का प्रयोग प्राचीन काल से विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। आयुर्वेद में इसे त्रिदोषनाशक, बल्य, आयुष्यवर्धक और रक्तशोधक माना गया है।रोग प्रतिरोधक क्षमता: संक्रमण से बचाव में सहायक।

मधुमेह नियंत्रण

ब्लड शुगर लेवल संतुलित रखने में मददगार। ज्वर नाशक: डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार में लाभकारी।

पाचन सुधार: कब्ज व अपच में कारगर।

जोड़ों का दर्द: गठिया और संधिवात में राहत प्रदान करता है।

खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियां

जलवायु: उपोष्णकटिबंधीय व उष्णकटिबंधीय क्षेत्र सर्वश्रेष्ठ। तापमान: 25°C से 35°C अनुकूल। मिट्टी: हल्की, दोमट, अच्छे जल निकास वाली (pH 6-7.5)।

प्रवर्धन और रोपण तकनीक

गिलोय की खेती बेल की कलम (30-45 सेमी) से आसानी से की जा सकती है। वर्षा या वसंत ऋतु में रोपण अधिक सफल रहता है। रोपण से पहले कलम को कार्बेन्डाजिम (0.1%) घोल में 5-10 मिनट डुबोकर रोगमुक्त करें। रोपण दूरी: 2 मीटर × 2 मीटर।

मचान या जाल का उपयोग आवश्यक।

सिंचाई और खाद प्रबंधन

गर्मी में 15 दिन के अंतराल पर, सर्दी में 25-30 दिन में सिंचाई।

प्रति पौधा सालाना 2-3 किलो गोबर खाद, 50-60 ग्राम नाइट्रोजन, 40 ग्राम फास्फोरस व 40 ग्राम पोटाश।

रोग एवं कीट नियंत्रण

गिलोय में रोग-किटक कम लगते हैं, फिर भी पत्ती धब्बा रोग में कार्बेन्डाजिम या मैन्कोज़ेब का छिड़काव, और एफिड्स की समस्या में नीम आधारित कीटनाशी का प्रयोग लाभकारी है।

कटाई, उपज और आय

रोपण के 8-10 महीने बाद कटाई संभव। एक हेक्टेयर से 20-25 क्विंटल हरी बेल या 4-5 क्विंटल सूखी गिलोय प्राप्त होती है। सूखी गिलोय 60-80 रुपये/किलो और पाउडर 150-200 रुपये/किलो बिकती है। एक हेक्टेयर से सालाना 1.5-2 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ संभव।

बाजार और प्रसंस्करण

गिलोय का उपयोग आयुर्वेदिक दवा उद्योग, हर्बल कंपनियों, वेलनेस सेंटर और निर्यात में होता है। इसे पाउडर, रस, कैप्सूल, सिरप, चूर्ण व टैबलेट में प्रसंस्कृत किया जा सकता है।

सारांश

गिलोय किसानों के लिए कम लागत में अधिक आय का अवसर और समाज के लिए स्वास्थ्य संवर्धन का प्राकृतिक स्रोत है। वैज्ञानिक पद्धति से खेती और मूल्य संवर्धन के प्रयास किसानों को आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ देश की हर्बल उद्योग में अग्रणी बना सकते हैं।

प्रो. (डॉ.) एस. के. सिंह

विभागाध्यक्ष, पादप रोग विज्ञान एवं सूत्रकृमि विज्ञान विभाग, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा-848125, समस्तीपुर, बिहार sksraupusa@gmail.com / sksingh@rpcau.ac.in

1 Comment

  1. Dinesh Nihalpura

    August 10, 2025

    बहुत ही अच्छी जानकारी सर

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *