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चार दशक बाद ICRISAT और नाइजर ने मिलाया हाथ!

अब जलवायु-सहनशील कृषि और खाद्य संप्रभुता को मिलेगा नया आयाम। 🌾 चार दशक बाद नया संकल्प: नाइजर में जलवायु-सहनशील कृषि को लेकर ICRISAT और नाइजर सरकार की साझेदारी फिर से मजबूत नियामी (नाइजर) नाइजर की 80% आबादी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है और लगभग 40% लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। ऐसे […]

अब जलवायु-सहनशील कृषि और खाद्य संप्रभुता को मिलेगा नया आयाम। 🌾

चार दशक बाद नया संकल्प: नाइजर में जलवायु-सहनशील कृषि को लेकर ICRISAT और नाइजर सरकार की साझेदारी फिर से मजबूत

नियामी (नाइजर) नाइजर की 80% आबादी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है और लगभग 40% लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) ने नाइजर के साथ अपनी चार दशक पुरानी साझेदारी को नवीनीकृत करते हुए जलवायु-सहनशील कृषि को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है।

विदेश मंत्री संगारे से हुई महत्वपूर्ण बैठक

ICRISAT के कंट्री रिप्रेजेंटेटिव प्रो. फलालू हामिदू ने नाइजर के विदेश मंत्री महामहिम बकारी याओ संगारे से मुलाकात की। बैठक में सतत कृषि और खाद्य संप्रभुता के लिए नई रणनीतियों पर चर्चा हुई।

विदेश मंत्री ने ICRISAT के योगदान की सराहना करते हुए कहा, “ICRISAT हमेशा स्वागत योग्य है, मंत्रालय इसका घर है।” उन्होंने जोर दिया कि आज जलवायु परिवर्तन के दबाव में ICRISAT की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

रिसर्च स्टेशन से किसानों तक समाधान

नाइजर के सादोरे रिसर्च स्टेशन से ICRISAT ने फसल सुधार, पशुधन एकीकरण, मिट्टी और जल प्रबंधन, तथा लैंडस्केप रिस्टोरेशन जैसी तकनीकों को विकसित कर किसानों तक पहुँचाया है। इनसे किसान शुष्क भूमि की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और सरकार की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा रणनीतियों के अनुरूप लाभान्वित हो रहे हैं।

साझेदारी को नई गति देने की तैयारी

प्रो. हामिदू ने बताया कि ICRISAT नाइजर सरकार के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर सिंचाई और खाद्य संप्रभुता से जुड़े कार्यक्रमों को गति देने के लिए तैयार है। उन्होंने सूखा-सहिष्णु बाजरा और ज्वार, पुनर्जीवित लैंडस्केप और एकीकृत उर्वरक प्रबंधन जैसी तकनीकों को विस्तार देने पर बल दिया।

DG डॉ. हिमांशु पाठक का दृष्टिकोण

ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा, “पिछले चालीस वर्षों से ICRISAT विज्ञान को समाधान में बदलते हुए नाइजर के किसानों को सूखे से लड़ने, मिट्टी पुनर्जीवित करने और गरिमा के साथ परिवारों का भरण-पोषण करने में सहयोग कर रहा है। आज हम नाइजर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहरा रहे हैं और यह विश्वास जताते हैं कि नाइजर साहेल क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खाद्य-सुरक्षित भविष्य की दिशा दिखा सकता है।”

भविष्य की राह

विदेश मंत्री संगारे ने ICRISAT के काम को सराहा और कृषि एवं पशुधन मंत्री के साथ सादोरे रिसर्च स्टेशन का दौरा करने की घोषणा की, ताकि राष्ट्रीय कृषि विकास लक्ष्यों को पाने के लिए व्यावहारिक समाधानों पर काम किया जा सके।

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