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ICRISAT की खोज: मूंगफली में समयपूर्व अंकुरण रोकने वाले 9 जीन मिले

ICRISAT की नई जीनोमिक खोज: मूंगफली की समयपूर्व अंकुरण समस्या का समाधान, किसानों को करोड़ों का नुकसान बचाने की उम्मीद हैदराबाद,  – इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) के वैज्ञानिकों ने मूंगफली (ग्राउंडनट) में समयपूर्व अंकुरण रोकने से जुड़ी एक बड़ी जीनोमिक खोज की है, जो किसानों को अनियमित बारिश से होने […]

ICRISAT की नई जीनोमिक खोज: मूंगफली की समयपूर्व अंकुरण समस्या का समाधान, किसानों को करोड़ों का नुकसान बचाने की उम्मीद

हैदराबाद,  – इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) के वैज्ञानिकों ने मूंगफली (ग्राउंडनट) में समयपूर्व अंकुरण रोकने से जुड़ी एक बड़ी जीनोमिक खोज की है, जो किसानों को अनियमित बारिश से होने वाले भारी आर्थिक नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

अनिश्चित मौसम और समय से पहले बरसात मूंगफली किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। विशेष रूप से स्पेनिश किस्में, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 60% हैं, समयपूर्व अंकुरण के प्रति अत्यंत संवेदनशील मानी जाती हैं। पकने के समय बारिश होने पर पैदावार 10–20% तक घट सकती है, जबकि गंभीर मामलों में यह नुकसान 50% तक पहुंच जाता है।

184 जर्मप्लाज्म के मूल्यांकन से मिला समाधान

ICRISAT जीनबैंक में संरक्षित 184 मूंगफली जीनोटाइप का दो मौसमों तक मूल्यांकन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि कुछ किस्में 30 दिनों से अधिक बिना अंकुरित हुए स्थिर रहीं, जबकि कुछ 7 दिनों के भीतर अंकुरित हो गईं।

वैज्ञानिकों ने 10–21 दिन तक बीज सुप्तावस्था बनाए रखने वाली श्रेष्ठ किस्मों का चयन किया, जो किसानों के लिए कटाई और सुखाई के समय में सुरक्षित अंतराल प्रदान कर सकती हैं।

9 प्रमुख जीनों की खोज

चयनित किस्मों की जीनोमिक स्क्रीनिंग में 9 उच्च-विश्वसनीयता वाले जीन पहचाने गए, जो फ्रेश सीड डॉर्मेंसी और प्री-हार्वेस्ट स्प्राउटिंग रेजिस्टेंस से जुड़े हैं। ये जीन भविष्य में उन्नत किस्मों के विकास की दिशा तय करेंगे।

वैज्ञानिकों की राय

डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड, उप महानिदेशक (अनुसंधान), ICRISAT ने कहा:
“मूंगफली अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण फसल है। बीज सुप्तावस्था को अनुकूलित करना सिर्फ छोटे किसानों के लिए लाभकारी नहीं है, बल्कि बदलते मौसम के बीच वैश्विक तेलबीज उत्पादन को भी सुरक्षित करेगा।”

डॉ. मनीष पांडेय, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, जीनोमिक्स एवं प्री-ब्रीडिंग ने कहा:
“हमारी खोज न केवल मूंगफली बल्कि कई फसलों में ताजे बीज की सुप्तावस्था को समझने का रास्ता खोलती है। जीनोमिक स्तर पर समाधान ही भविष्य में सबसे किफायती और प्रभावी विकल्प है।”

भविष्य के लिए तैयार किस्में

अध्ययन से प्राप्त जीनोमिक जानकारी के आधार पर ICRISAT की ब्रीडिंग टीम 2–3 सप्ताह की बीज सुप्तावस्था वाली ऐसी किस्में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो किसानों को कटाई के समय अचानक होने वाली बारिश के जोखिम से बचा सकें।

ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा:
जलवायु अनिश्चितताओं के बीच यह जीनोमिक खोज छोटे किसानों के लिए परिवर्तनकारी अवसर है। मैं विश्वभर के मूंगफली प्रजनकों से आग्रह करता हूं कि वे इन खोजों का उपयोग करके अधिक सहनशील किस्में विकसित करें।”

ICRISAT पहले भी मूंगफली में हीट टॉलरेंस, रोग प्रतिरोध एवं ब्लैंचेबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण गुणों से जुड़े जीनोमिक रहस्यों का पता लगा चुका है, जिसके आधार पर वैश्विक स्तर पर नई किस्मों के विकास की गति तेज हुई है।

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