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बाढ़ नियंत्रण के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

अब तक 1,575 बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं पूरी, 31 मार्च तक ड्रेन सफाई लखनऊ, 28 फरवरी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नदियों की स्थानीय परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन कराने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा […]

अब तक 1,575 बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं पूरी, 31 मार्च तक ड्रेन सफाई

लखनऊ, 28 फरवरी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नदियों की स्थानीय परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन कराने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी नदियों के मुख्य प्रवाह में सिल्ट अधिक मात्रा में जमा हो और वे उथली हो गई हों, वहां ड्रेजिंग (गाद निकालने) को प्राथमिकता दी जाए। यदि इससे समाधान संभव न हो, तो तटबंध निर्माण व कटान निरोधी अन्य उपाय किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी नदियों का ड्रोन सर्वेक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति की समुचित जानकारी जुटाई जाए। उन्होंने बाढ़ की दृष्टि से अति संवेदनशील और संवेदनशील जिलों में सुरक्षा तैयारियों की भी समीक्षा की।

आठ वर्षों में व्यापक सुधार, बाढ़ से खतरा हुआ कम
प्रतीकात्मक ग्राफिक्स

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते आठ वर्षों में बाढ़ नियंत्रण के लिए किए गए सुनियोजित प्रयासों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। बाढ़ प्रभावित अति संवेदनशील जिलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और अंतरविभागीय समन्वय के जरिए बाढ़ से होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने में सफलता मिली है।

समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई ने बताया कि वर्ष 2018-19 से अब तक 1,575 बाढ़ परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, जिनमें अकेले वर्ष 2024-25 में 305 परियोजनाएं शामिल हैं। इन प्रयासों से लगभग 4.97 लाख हेक्टेयर भूमि और 60.45 लाख की आबादी को लाभ हुआ है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वर्तमान वित्तीय वर्ष की परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा किया जाए, ताकि कार्य में अनावश्यक देरी और बजट बढ़ने की समस्या न आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना का बजट पुनरीक्षण नहीं किया जाएगा।

बाढ़ के लिहाज से 24 जिले अति संवेदनशील

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 24 जिले बाढ़ की दृष्टि से अति संवेदनशील हैं, जिनमें महाराजगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, बिजनौर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, गोण्डा, बलिया, देवरिया, सीतापुर, बलरामपुर, अयोध्या, मऊ, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, बदायूं, अम्बेडकर नगर, आजमगढ़, संतकबीर नगर, पीलीभीत और बाराबंकी शामिल हैं। वहीं, 16 अन्य जिले संवेदनशील श्रेणी में आते हैं, जिनमें सहारनपुर, शामली, अलीगढ़, बरेली, हमीरपुर, गौतमबुद्ध नगर, रामपुर, प्रयागराज, बुलंदशहर, मुरादाबाद, हरदोई, वाराणसी, उन्नाव, लखनऊ, शाहजहांपुर और कासगंज प्रमुख हैं।

मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने और अति संवेदनशील व संवेदनशील तटबंधों का वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निरीक्षण कराने के निर्देश दिए।

बाढ़ सुरक्षा के लिए 523 तटबंध और 10,727 ड्रेन सक्रिय

प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण के लिए 523 तटबंधों की कुल लंबाई 3,869 किमी और ड्रेनों की कुल लंबाई 60,047 किमी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी तटबंधों की लगातार निगरानी की जाए और ड्रेनों की सफाई 31 मार्च तक अनिवार्य रूप से पूरी कर ली जाए

उन्होंने राज्य व जिला स्तर पर 24×7 बाढ़ राहत कंट्रोल रूम सक्रिय रखने, श्रावस्ती, गोण्डा, सीतापुर, हरदोई और बाराबंकी में प्रस्तावित कार्यों को तय समय में पूरा करने और नदियों में अवैध खनन रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए।

रिपोर्ट, आशुतोष शुक्ला

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