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नेचुरल पर्ल फ़ार्मिंग को बढ़ावा देने की पहल

मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार ने राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से प्राकृतिक पर्ल फ़ार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। मत्स्यपालन विभाग द्वारा की गई प्रमुख पहल में शामिल हैं – राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 461.00 लाख रुपए की कुल […]

मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार ने राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से प्राकृतिक पर्ल फ़ार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। मत्स्यपालन विभाग द्वारा की गई प्रमुख पहल में शामिल हैं –

  1. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 461.00 लाख रुपए की कुल लागत से प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत अनुमोदित 2307 बाइवाल्व कल्टीवेशन (मसल्स, क्लैम्स,  पर्ल आदि सहित) इकाइयां ।
  2.  मत्स्यपालन विभाग द्वारा आयोजित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंचों पर प्राकृतिक पर्ल फ़ार्मिंग और इसके आर्थिक महत्व को प्रदर्शित करने के लिए पर्ल किसानों को सहायता ।
  3.  पीएमएमएसवाई के अंतर्गत पर्ल क्लस्टर सहित मात्स्यिकी और जलीय कृषि क्षेत्र में क्लस्टरों के विकास के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रसारित की गई।
  4.  झारखंड सरकार के सहयोग से हजारीबाग, झारखंड में पर्ल फ़ार्मिंग क्लस्टर की अधिसूचना और विकास (v) मरीन पर्ल ऑयस्टर की प्राकृतिक आबादी को बढ़ाने के लिए, आईसीएआर-सेंट्रल मरीन रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमएफआरआई) ने तमिलनाडु तट के तूतीकोरिन क्षेत्र में 1.65 करोड़ हैचरी द्वारा उत्पादित सीड रेंच किए हैं।

    symbolic picture
    प्रतीकात्मक चित्र

गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा, केरल, राजस्थान, झारखंड, गोवा और त्रिपुरा के कुछ इलाकों में पर्ल कल्चर प्रैक्टिस की जा रही है। राज्य सरकारों द्वारा राज्यवार प्राकृतिक पर्ल उत्पादन के आंकड़े नहीं रिपोर्ट किए जाते हैं।  राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) ने रिपोर्ट किया है कि झारखंड के हजारीबाग जिले में 1.02 लाख पर्ल उत्पादित हुए हैं। मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार ने प्राकृतिक पर्ल के मार्केट लिंकेज को मजबूत करने के लिए राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ कई बैठकें की हैं।

मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार ने अनुसंधान और तकनीकी सहायता के लिए पर्ल क्लस्टर विकास में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के मात्स्यिकी संस्थानों को शामिल किया है। आईसीएआर ने रिपोर्ट किया  है कि आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवॉटर एक्वाकल्चर (सीआईएफए), भुवनेश्वर ने विगत पांच वर्षों के दौरान राज्य मात्स्यिकी विभागों के सहयोग से 1500 से अधिक प्रतिभागियों को फ्रेश वॉटर पर्ल फ़ार्मिंग के विभिन्न पहलुओं पर 15 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं और आईसीएआर-सेंट्रल मरीन फिशरीज़ रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमएफआरआई), कोच्चि ने केरल में 400 से अधिक प्रतिभागियों को मरीन पर्ल फ़ार्मिंग के विभिन्न पहलुओं पर क्षेत्रीय भाषा में ट्रेनिंग दी है।

यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार के नए साधन सृजित करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। “natural-pearl-farming-india”

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