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जैविक खाद्य: सेहत भी सुरक्षित, पर्यावरण भी संरक्षित!

ऑर्गेनिक फूड: स्वास्थ्य और सतत विकास का आधार कृषि में जैविक खेती के बढ़ते प्रभाव पर विशेषज्ञों की राय, प्रमाणन प्रक्रिया को बताया जरूरी तेजी से बढ़ती जनसंख्या और खाद्य सुरक्षा की चुनौती ने ग्लोबल स्तर पर जैविक खाद्य पदार्थों की मांग को मजबूती दी है। रसायनों, कीटनाशकों और सिंथेटिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से […]

ऑर्गेनिक फूड: स्वास्थ्य और सतत विकास का आधार

कृषि में जैविक खेती के बढ़ते प्रभाव पर विशेषज्ञों की राय, प्रमाणन प्रक्रिया को बताया जरूरी

तेजी से बढ़ती जनसंख्या और खाद्य सुरक्षा की चुनौती ने ग्लोबल स्तर पर जैविक खाद्य पदार्थों की मांग को मजबूती दी है। रसायनों, कीटनाशकों और सिंथेटिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए अब उपभोक्ता तेजी से ऑर्गेनिक उत्पादों की ओर रुख कर रहे हैं।

देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक और ऑर्गेनिक फूड प्रमोटर इस बात पर एकमत हैं कि जैविक खेती न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण और जैव विविधता को भी बढ़ावा देती है। हाल ही में मोदीपुरम स्थित आईसीएआर-आईएफएसआर के परियोजना समन्वयक डॉ. एन रविशंकर ने “कृषि टाइम्स” से बातचीत में बताया कि ऑर्गेनिक उत्पादों की पहचान के लिए प्रमाणन प्रक्रिया बेहद आवश्यक है।

🌿 जैविक कृषि के लाभ

जैविक खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक विधियों, जैसे गोबर खाद, हरी खाद और जैविक कीट नियंत्रण का उपयोग किया जाता है। वहीं, पारंपरिक खेती में उत्पादन बढ़ाने के लिए हानिकारक रसायनों का सहारा लिया जाता है, जो दीर्घकालिक रूप से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह होते हैं।

🔍 उपभोक्ताओं के लिए प्रमाणन प्रणाली की भूमिका

डॉ. एन रविशंकर बताते हैं कि भारत सरकार की ‘प्रमाणित ऑर्गेनिक’ लेबलिंग उपभोक्ताओं को यह भरोसा देती है कि उत्पाद जैविक मानकों के अनुसार तैयार किए गए हैं। यह प्रमाणन दो स्तरों पर किया जाता है—राष्ट्रीय मानकों के तहत उत्पादन प्रक्रिया और मार्केटिंग की जांचयूके और अन्य यूरोपीय देशों में भी इसी तरह की प्रमाणन प्रणाली अपनाई जाती है, जिसमें हर साल जांच और निरीक्षण होते हैं।

जिन उत्पादों को ‘ऑर्गेनिक’ के रूप में बेचा जाता है, उनके साथ एक सर्टिफिकेट होना जरूरी है, जिससे यह साबित किया जा सके कि वे रसायन मुक्त हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हैं।

🌾 किसानों की नई पहल और चुनौतियां

फार्मर फाउंडेशन’ की संस्थापक श्रीमती श्रद्धा जे. यामकर ने बताया कि आज के युवा किसान जैविक खेती को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। आदिवासी क्षेत्रों और पर्वतीय गांवों में महिलाएं भी इस दिशा में आगे आ रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सही जानकारी और बाजार से जुड़ाव के अभाव में कई किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि किसानों को यह सिखाने की जरूरत है कि कैसे वे लागत कम करके उत्पादन बढ़ा सकते हैं और सही बाजार तक अपनी उपज पहुँचा सकते हैं।

🌱 सारांश

विशेषज्ञों की राय है कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत और पारदर्शी प्रमाणन प्रणाली जरूरी है। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और किसानों को उनके उत्पादों का सही मूल्य मिल सकेगा। साथ ही, यह सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक सिद्ध होगी।

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