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रोज-सुगंधित लीची ने तय किया विदेश का सफर

🌹रोज-सुगंधित लीची की पहली खेप पंजाब से कतर और दुबई रवाना पठानकोट–भारत के बागवानी उत्पादों के वैश्विक स्तर पर प्रसार और निर्यात को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार और पंजाब सरकार के बागवानी विभाग ने […]

🌹रोज-सुगंधित लीची की पहली खेप पंजाब से कतर और दुबई रवाना

पठानकोट–भारत के बागवानी उत्पादों के वैश्विक स्तर पर प्रसार और निर्यात को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार और पंजाब सरकार के बागवानी विभाग ने संयुक्त रूप से रोज-सुगंधित लीची की पहली खेप का निर्यात करवाया है।

यह खेप पंजाब के पठानकोट जिले से रवाना की गई, जिसमें 1 मीट्रिक टन लीची कतर की राजधानी दोहा और 0.5 मीट्रिक टन लीची संयुक्त अरब अमीरात के दुबई के लिए निर्यात की गई। यह दोहरी उपलब्धि भारत की बागवानी क्षमताओं का प्रमाण है और वैश्विक बाजार में भारतीय फलों की मांग को दर्शाती है।

इस पहल में लुलु ग्रुप और पंजाब के प्रगतिशील किसान प्रभात सिंह (सोजनपुर, पठानकोट) की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने अपने खेतों में उत्कृष्ट गुणवत्ता की रोज-सुगंधित लीची उगाईAPEDA के मार्गदर्शन में यह खेप रेफर पैलेट (विशेष शीत-श्रृंखला युक्त कंटेनर) में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पैक कर रवाना की गई, जिससे फल की ताजगी और गुणवत्ता बनी रहे।

पंजाब में लीची पैदावार

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में पंजाब का लीची पैदावार 71,490 मीट्रिक टन रहा, जो देश के कुल लीची पैदावार का 12.39 प्रतिशत है। इस अवधि में भारत से कुल 639.53 मीट्रिक टन लीची का निर्यात किया गया। पंजाब में लीची की खेती लगभग 4,327 हेक्टेयर में की जाती है, और औसतन उपज 16,523 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही है।

पठानकोट क्षेत्र की जलवायु लीची की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। यहां की मिट्टी, तापमान और नमी की स्थिति लीची के पौधों के विकास के लिए अनुकूल है। यही कारण है कि यहां उगाई गई लीची स्वाद, आकार और सुगंध के मामले में बेहतर मानी जाती है।

किसानों को मिलेगा ग्लोबल मंच

यह निर्यात पहल किसानों के लिए न केवल आर्थिक अवसर लेकर आई है, बल्कि उन्हें वैश्विक मानकों के अनुसार उत्पादन करने की प्रेरणा भी दे रही है। प्रभात सिंह जैसे किसानों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग से भारतीय किसान भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

APEDA ने इस पहल के माध्यम से न केवल किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) और छोटे किसानों को निर्यात की दिशा में मार्गदर्शन दिया, बल्कि उन्हें वैश्विक खरीदारों से जोड़ने का भी कार्य किया। इससे भारत का कृषि निर्यात आधार व्यापक हुआ है और नए बाजारों में पहुंच संभव हुई है।

बढ़ता हुआ बागवानी निर्यात

वर्ष 2024-25 (अप्रैल–मार्च) के दौरान भारत का फल एवं सब्जी निर्यात USD 3.87 बिलियन तक पहुंच गया, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 5.67% की वृद्धि दर्ज की गई। आम, अंगूर, केला और संतरा जैसे फलों के साथ-साथ अब लीची, जामुन और चेरी जैसे फलों की भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ रही है।

भारत सरकार ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP), ‘वोकल फॉर लोकल‘ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित कर रही है कि वे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का उत्पादन करें और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करें।

🌹सारांश

रोज-सुगंधित लीची की पहली खेप का कतर और दुबई को निर्यात भारत के बागवानी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर है। यह न केवल देश की निर्यात क्षमताओं को दर्शाता है, बल्कि किसानों की मेहनत और गुणवत्ता उत्पादन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है। इस सफलता से प्रेरणा लेकर अन्य फल उत्पादक किसान भी निर्यात की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं।

फोटो: सोशल मी़डिया

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