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- बागवानी

पोषण वाटिका योजना 2026: बच्चों के पोषण के लिए आयुष मंत्रालय की पहल

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की ‘पोषण वाटिका’ योजना: बच्चों के पोषण और औषधीय पौधों के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम नई दिल्ली।-आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने ‘पोषण वाटिका’ की स्थापना के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह योजना केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) के तहत हर्बल गार्डन […]

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की ‘पोषण वाटिका’ योजना: बच्चों के पोषण और औषधीय पौधों के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

नई दिल्ली।-आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने ‘पोषण वाटिका’ की स्थापना के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। यह योजना केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) के तहत हर्बल गार्डन कंपोनेंट के अंतर्गत लागू की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य स्कूल स्तर पर बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना और उन्हें औषधीय पौधों की खेती से जोड़ना है। फिलहाल यह योजना आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, असम और छत्तीसगढ़—इन पांच राज्यों में लागू की जा रही है।

बच्चों में पोषण जागरूकता पर विशेष जोर

‘पोषण वाटिका’ योजना का प्रमुख उद्देश्य स्कूलों में पोषण को बढ़ावा देना है। इसके तहत स्कूल परिसरों या संबंधित संस्थानों में फल, सब्जी एवं औषधीय पौधों की खेती की जाएगी, ताकि बच्चे पौधों के महत्व को समझ सकें और पोषण से जुड़ी स्वस्थ आदतें विकसित कर सकें। साथ ही, आयुर्वेद आधारित औषधीय पौधों की जानकारी देकर बच्चों में प्राकृतिक जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 30 प्रकार के पौधों का रोपण अनिवार्य किया गया है। परियोजना के लिए 100 वर्ग मीटर से लेकर 2 एकड़ तक का क्षेत्र निर्धारित किया गया है।
परियोजना गतिविधियों में पौधारोपण, सिंचाई व्यवस्था, प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, सूचना-साइन बोर्ड की स्थापना तथा पौधों का नियमित रखरखाव शामिल है। योजना में तुलसी, आंवला और सहजन (मोरिंगा) जैसे पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर पौधों को प्राथमिकता दी गई है।

तीन वर्षों के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता

एनएमपीबी द्वारा इस योजना के अंतर्गत तीन वर्षों के लिए कुल ₹7 लाख की 100 प्रतिशत सहायता प्रदान की जाएगी।

  • पहले वर्ष में पोषण वाटिका की स्थापना के लिए ₹4.50 लाख दिए जाएंगे।

  • दूसरे वर्ष में रखरखाव हेतु ₹1.25 लाख की सहायता मिलेगी।

  • तीसरे वर्ष में भी रखरखाव के लिए ₹1.25 लाख का अनुदान प्रदान किया जाएगा।

यह वित्तीय सहायता पौधों की रोपाई से लेकर उनके संरक्षण और जागरूकता गतिविधियों तक सभी आवश्यक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने में सहायक होगी।

कौन कर सकता है आवेदन

इस योजना के लिए सरकारी संगठन, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) और स्वैच्छिक संस्थाएं आवेदन कर सकती हैं, बशर्ते उन्हें इस क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव हो। अनुभवी संस्थाओं की भागीदारी से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की उम्मीद जताई जा रही है।

आवेदन की प्रक्रिया और अंतिम तिथि

योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इच्छुक संस्थाएं https://ngo.ayush.gov.in/ के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।
प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 20 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है।

पोषण और आयुष को बढ़ावा देने की दिशा में पहल

विशेषज्ञों के अनुसार ‘पोषण वाटिका’ योजना न केवल बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाएगी, बल्कि औषधीय पौधों के संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान के प्रसार और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पहल स्कूलों और समाज को स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम मानी जा रही है।

चित्र: ग्राफ़िक्स

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